Religion

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धर्म मज़हब कि आबरू मे हम
इंसानियत को भूल गये

सही गलत कि पहचान मे हम
बहार-ए-ख़ुशी को भूल गये

धर्म कि इस लड़ाई मे हम
सच्चा प्यार भूल गये

इक बात बता दो दोस्तो कि सुख किसमे हे गर सुख का मतलब धर्म हे तो इसके रंग हज़ार क्यों.....
बचपन से सुनते आये हे कि दया धर्म का मूल हे मगर धर्म के इस अवतार मे हम दया को ही भूल गये

धर्म के इस रंग मे हम
प्यार का रंग भूल गये

धर्म कि इस कश्मकश मे हम
हक ए गरीब भूल गये

चलो अपनाये साथ चलने का नया अंदाज़ इस दहल-ए-खराब को बदले आज ।।

Palak Gupta
BJMC(1st Year)