One Day From Our Childhood

वो दिन भी क्या हुआ करते थे,
जब हम चैन से जिया करते थे|
वो मॉ का सुबह-सुबह उठाकर स्कूल के लिए दौड़ाना
वही अप्पा का ऊंची आवाज में हम पर चिल्लाना-
“क्यु जल्दी नही उठा करते हो”
“क्यु हर रोज स्कूल के लिए लेट हुआ करते हो”
वो दीदी का राइडर की तरह साइकल चलाना, और उसके पीछे बैठ मेरा डर से थर-थराना|
अक्सर मैं लंच बॉक्स और ड्राइंग का सामान घर पे भुल जाया करता था,
जिसे देने अप्पा को स्कुल तक आना पड़ता था|
लंच बाक्स में मां का लाड रखना, वो रोटी के बीच 2 रुपए छुपाना, वो स्कूल से दोस्तो के साथ होली खेल के आना|
घर पहुंचते ही मां का ड्रेस देख कर लाल हो जाना,
पर अप्पा के गुस्से से बचाने के लिए ड्रेस धो कर सुखाना|
वो घर के सामने वाले पार्क में खेलने के लिए मां की दुध की शर्त पुरी करना,
धूप से बचने के लिए अप्पा का टोपी लाना|
वो हल्की रात होते ही मां के साथ गेट पर बैठ अप्पा का इंतजार करना,
अप्पा के आते ही स्कुटर पर उल्टा बैठ पुरी गली में धुमना|
वो रात के खाने के बाद आइस्क्रिम वाले तक चलके जाना,
दीदी से आइस्क्रिम की बाईट के लिए लड़ते हुए रोड़ पर गिर जाना|
वो अप्पा का ब्रेव बॉय करते हुए मुझे उठाना,
वो मां का मुझे चुप कराने के लिए रोड़ को मारना|
वो मां का दुलार करते हुए ऑचल में सुलाना,
फिर अगली सुबह मां का हमें उठाके स्कूल के लिए दौडाना,
फिर वही अप्पा का चिल्लाते हुए हमे समझाना,,
भला ही वो 2 कमरो का ही घर था, पर फिर भी हम सुकुन से रहा करते थे|
वो भी क्या दिन हुआ करते थे,
जब हम चैन से जिया करते थे|
Adarsh Katara
BJMC(1st Year)
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